HomeHealth Tips

चूर्ण (मधुमेह रोग, पुरूष रोग, कब्ज़ व गैस) बनाने की विधि

चूर्ण (मधुमेह रोग, पुरूष रोग, कब्ज़ व गैस) बनाने की विधि
Like Tweet Pin it Share Share Email

चूर्ण बनाने की आसान विधि

चूर्ण का उपयोग बहुत से बिमारियों में किया जाता है बाज़ार में बहुत तरह के चूरण मिलते हैं जिनकी कोई गारंटी नहीं होती की उसमे क्या है और क्या नहीं यहाँ हम आपको अपने घर पर चूर्ण बनाने का तरीका सिखा रहे है ताकि आपको शुद्ध चूर्ण  मिल सके . बहुत से चूर्ण  जो बाज़ार में नकली आते  हैं वो सिर्फ आयुर्वेद को बदनाम करने की साजिश है विदेशी कंपनी की अत सावधानी रखे और जो विधि बताई जा रही है उस से निर्माण करें

चूर्ण जो आपका कद लम्बा करेगा

कुछ लोगों की हाइट समय से पहले ही बढ़ना रुक जाती है। इसका मुख्य कारण शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व न मिलना और हार्मोन की गड़बड़ी है। दरअसल, हमारी लंबाई बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन यानी एचजीएच का होता है। एचजीएच पिट्युटरी ग्लैंड से निकलता है। यदि आपके साथ भी यह समस्या है तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं हाइट बढ़ाने और कर्वी फिगर पाने के कुछ खास नुस्खे….

१.नुस्खा – अश्वगंधा और सूखी नागौरी दोनों को ही आयुर्वेद में शारीरिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।

सामग्री – 20 ग्राम सूखी नागौरी।
– 20 ग्राम अश्वगंधा।
– 20 ग्राम चीनी या देसी खांड ।
बनाने की विधि- सूखी नागौरी और अश्वगंधा की जड़ को बारीक पीस लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में चीनी मिला लें। यह मिश्रण कांच की बोतल में भर लें।
ऐसे करें सेवन- रात को सोते समय रोज दो चम्मच चूर्ण लें। फिर गाय का दूध पिएं। इससे हाइट बढ़ने के साथ ही हेल्थ भी बन जाती है। इस चूर्ण को लगातार 40 दिन तक लें। सर्दियों में यह चूर्ण अधिक फायदा करता है।

२.  नुस्खा– काले तिल और अश्वगंधा का यह योग नियमित रूप से सेवन करने पर हाइट बढ़ने लगती है।
सामग्री- 1.अश्वगंधा चूर्ण।
2. काले तिल।
3. खजूर।
4. गाय का घी।
बनाने की विधि- 1 से 2 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण और 1 से 2 ग्राम काले तिल को पीसकर चूर्ण बना लें।
ऐसे करें सेवन- इस चूर्ण को 3 से 5 खजूर में मिलाकर 5 से 20 ग्राम गाय के घी में एक महीने तक खाने से लाभ होता है।

३. नुस्खा  – केवल अश्वगंधा का पाउडर लेने से भी कद बढ़ने लगता है।

सामग्री- 1. अश्वगंधा की जड़
2. चीनी
3. दूध
बनाने की विधि- थोड़ी सी मात्रा में अश्वगंधा की जड़ लेकर उसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में चीनी मिलाकर रख लें।

ऐसे करें सेवन- इस मिश्रण को 2 चम्मच मात्रा में एक गिलास दूध में डालकर पिएं। रात को सोने से पहले 45 दिनों तक इस योग का सेवन करने से शरीर सुडौल बनता है और कद बढ़ जाता है।

सावधानियां– फास्ट फूड या जंक फूड का सेवन न करें।
– खटाई न खाएं।
– ज्यादा मिर्च-मसाले से परहेज करें।
– इन दवाओं का सेवन गाय के दूध से करें तो बेहतर है।

ये भी करें-
जिन लोगों का कद नहीं बढ़ रहा हो उन्हें रोज ताड़ आसन और भुजंगासन करना चाहिए।

ताड़ आसन विधि :- ताड़ आसन करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों हाथ ऊपर उठाएं। हाथ उठाकर सांस अंदर लें। अपने पैर के पंजों पर कुछ समय के लिए खड़े हो जाएं।

दोनों हाथों को मिलाएं और अपने शरीर को ऊपर की तरफ खीचें। कुछ देर उसी अवस्था में रहें। फिर सांस बाहर छोड़ें और दोनों पैर के पंजों को सामान्य अवस्था में ले आएं। यह क्रिया 10 से 15 बार करें।

भुजंगासन विधि :- पेट के बल लेट जाएं। दोनों पैरों को मिलाकर रखिए। सिर जमीन पर, आंखें खुली हुई और दोनों बाजू को कोहनी से मोड़ें। हाथों को कंधों के नीचे रखें। कोहनी बाहर की ओर न हो, बल्कि शरीर के साथ लगाकर रखें।
एक ही बार में सांस नहीं भरेंगे, बल्कि आसन करते हुए धीरे-धीरे सांस भरें।
धीरे-धीरे सांस लेना शुरू करें और फिर सिर को उठाएं। गर्दन को पीछे की ओर मोड़ें। पीठ की मांसपेशियों का बल लगाते हुए आप कंधे भी उठाएं। हथेलियों पर थोड़ा दबाव रखते हुए छाती और नाभि तक का भार उठाएं।

हर स्थिति में नाभि को जमीन से 30 सेंटीमीटर ही ऊपर उठाना चाहिए। ज़्यादा नहीं, अन्यथा कमर भी उठ जाएगी। इस स्थिति में कोहनी सीधी नहीं होगी। इसके बाद आकाश की ओर देखें। इस अवस्था में सांस रोंके। कमर के निचले भाग पर खिंचाव आएगा, जिसे आप महसूस कर पाएंगे। इस स्थिति में 3-4 सेकंड तक रहें और फिर सामान्य अवस्था में आ जाएं।

इसके साथ ही अपने डाइट चार्ट में ज्यादा से ज्यादा फल और मेवे शामिल करें। कद बढ़ने लगेगा।

त्रिकटु चूर्ण बनाने की विधि :- Trikatu churn

यह चूर्ण तीन द्रव्यों से मिलकर बना है । इसे साधारण दवा मत समझियेगा, यह बड़े काम का चूर्ण है। आप इसे घर पर बड़ी आसानी से बना सकते है ।

इसे बनाने के लिये तीन द्रव्यों की आवश्यकता होती है। ये हैं [१] सोन्ठ अथवा सुन्ठी अथवा सूखी हुयी अदरख [२] काली मिर्च [३] छोटी पीपल

इस तीनों को बराबर बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर अथवा मिक्सी में डालकर महीन चूर्ण बना लें । ऐसा बना हुआ चूर्ण “त्रिकटु चूर्ण” के नाम से जानते है।

यह चूर्ण अपच, गैस बनना, पेट की आंव, कोलायटिस, बबासीर, खान्सी, कफ का बनना, साय्नुसाइटिस, दमा,प्रमेह तथा अनुपान भेद से बहुत सी बीमारियों में लाभ पहुंचाता  है ।

इसे सेन्धा नमक के साथ मिलाकर खाने से वमन, जी मिचलाना , भूख का न लगना आदि मे लाभ कारी है

तिल सप्तक चूर्ण बनाने की विधि  Til Saptak churn

इस चूर्ण को बनाना बहुत आसान है। इसको बनाने के लिये निम्न द्रव्यों की आवश्यकता होती है।

१- तिल

२- चीता यानी चित्रक

३- सोन्ठ

४- मिर्च काली

५- पीपल छोटी

६- वाय विडन्ग

७- बडी हरड़

इन सभी द्रव्यों को बराबर मात्रा में ले कर Churan बना लें। Churan बनाने के लिये पहले सभी द्रव्यों के छोटे छोटे टुकडे कर लें फिर मिक्सी अथवा इमाम दस्ते या खरल में डालकर महीन Churan बना लें।

ईस प्रकार से महीन Churan किया गया पदार्थ औषधि के उपयोग के लिये तैयार है।

“तिल सप्तक चूर्ण”  को निम्न रोगों में उपयोग करते है।

  • बवासीर नाशक यानी Piles / Hemorrhoids / Varicosis of all nature
  • पान्डु नाशक यानी Aneamia / Jaundice and like syndromes
  • कृमि नाशक यानी De-wormicular/ Vermifugal / Anti-helmenthesis
  • कास नाशक / खान्सी नाशक यानी Anti-tussive
  • अग्निमान्द्य / मन्दाग्नि / भूख का खुलकर न लगना यानी Loss of Appetite / weak appetite
  • ज्वर / साधारण बुखार यानी Fever, Pyrexia
  • गुल्म रोग

चिकित्सा के उपयोग के लिये इस चूर्ण को ३ ग्राम से लेकर ६ ग्राम की मात्रा मे बराबर गुड़ मिलाकर सुबह और शाम सेवन करना चाहिये। आयु के हिसाब से मात्रा घटाई जा सकती है।

मदन प्रकाश चूर्ण बनाने की विधि

Madan  Prakash Churna

सामग्री; ताल मखाना, मूसली, विदारीकन्द, सोठ,अश्वगन्धा, कौन्च के बीज, सेमर के फूल, बीज बन्द,शतावर, मोचरस, गोखरू, जायफल, घी में भूनी हुयी ऊड़द की दाल, , पोस्तादाना और बन्सलोचन , यह सभी द्रव्य एक एक हिस्सा लेकर महीन से महीन चूर्ण बना लें और इस सभी वस्तुओं के चूर्ण के हिस्से के बराबर शक्कर लें और इस शक्कर को महीन से महीन पीसकर उपरोक्त चूर्ण में मिला लें ।

यह अब पुरूष रोग को दूर करने की चूर्ण (औषधि ) तैयार हो गयी।

इस चूर्ण की मात्रा २ से ४ ग्राम तक है और इसे सुबह शाम गाय के दूध अथवा जो भी दूध मिले उसके साथ या जिन्हे दूध माफिक न आता हो , वे मलाई या रबड़ी मिलाकर या घी मिलाकर या मक्खन मिलाकर या इनमे से कुछ भी न मिले तो सादा पानी के साथ सेवन करना चाहिये।

आयुर्वेद की इस औषधि के सेवन से निम्नांकित फायदे होते हैं ;

१- यह पौष्टिक चूर्ण है, इसके शरीर की पुष्टता बढाता है।

२- यह रसायन गुण युक्त है इसलिये यह चूर्ण आयुर्वेदोक्त सप्त धातुओं की रक्षा करके रस, रक्त, मान्स , मेद,अस्थि, मज्ज, और शुक्र धातुओं की बृध्धि करता है।

३- यह बाजीकरण योग है इसलिये यह कमजोर मनुष्यों को सम्भोग करने के लिये अधिक वीर्य उत्पादन के लिये सम्र्थ बनाता है।

४- डायबिटीज के रोगियों के लिये यह चूर्ण किसी वरदान से कम नही है । डायबिटीज के रोगियों की सम्भोग अथवा मैथुन करने की क्षमता कमजोर हो जाती है । इस चूर्ण के सेवन करने से डायबिटीज के रोगियों को दोतरफा फायदा होता है / इससे प्रमेह की शिकायत भी दूर होती है ।

५- जिनका शुक्र, हस्त मैथुन या अन्य अप्राकृतिक तरीके अपनाने के बाद पानी जैसा पतला हो गया हो , इस चूर्ण के सेवन करने से वीर्य शुध्धि होकर गढा और प्राकृतिक हो जाता है।

६- जिनके SEMEN  में कोई भी विकृति हो, sperm counts कम हों या स्पेर्म न बन रहे हों , उन्हें इस औषधी का उपयोग जरूर करना चाहिये ।

मदन प्रकाश Churan को सभी प्रकार के शुक्र दोषों में उपयोग किया जा सकता है । शरीर की General Health Condition को improve  करने के लिये तथा कु-पोषण से पीड़ित रोगियों के लिये यह एक लाभकारी औषधि है ।

मधुमेह नाशक चूर्ण बनाने की विधि

Churan बनाने की विधि =

गुड़मार 8तोला

बिनोले की मींगी 4 तोला

जामुन के गुठली की मींगी4 तोला

सूखे बिल्व पत्र 6 तोला तथा

सूखे निम्ब पत्र 2 तोला । इन सब को कूटकर पीसकर कपड़ छान चूर्ण बना लें ।और शीशी में भर लें ।
मात्रा = 2 से 3 ग्राम दिन में दो बार जल के साथ सेवन करें
उपयोग = इसके सेवन से मधुमेह रोग के कारण उतपन्न होती रहने वाली शर्करा पर अतिशीघ्र काबू हो जाता है ।इसके अतिरिक्त यह अग्नाशय  और यकृत के विकारों को दूरकर मधुमेह का नाश भी करती है ।
यदि वसन्त कुसुमाकर रस के सह पान के रूप से इस चूर्ण का प्रयोग किया जाय तो मधुमेह रोग में निश्चित रूप से लाभ होने की आशा है ।

लवण भास्कर चूर्ण बनाने की विधि

( Importance of Lavan Bhaskar Churn ) :

इसकी सबसे ख़ास बात ये है कि ये निरापद योग है जिसे 1 से 3 ग्राम की मात्रा में लेने पर व्यक्ति की सभी उदर सम्बन्धी समस्याएं दूर हो जाती है. इस योग का प्रयोग काँजी, पानी और दही के साथ लिया जाता है किन्तु मूढढे के साथ लेने पर इसका सर्वाधिक लाभ मिलता है.

अगर इस चूर्ण को रात के समय गर्म पानी के साथ लिया जाए तो खुलकर शौच आता है, जिससे कब्ज में राहत मिलती है. वहीँ अगर इस चूर्ण में समान मात्रा में पंचसकार चूर्ण मिलाकर प्रयोग किया जाए तो ये दस्त तक लगा देता है जिससे दिन में 3 से 4 बार दस्त आते है और पेट पूरी तरह साफ़ हो जाता है.

इसका सेवन त्वचा सम्बन्धी सभी रोगों से निजात पाने और आम वात रोगों को दूर करने के लिए भी होता है. भूख बढाने, पेट की वायु को बाहर निकलने, डकार इत्यादि में भी इस चूर्ण का इस्तेमाल  फायदेमंद रहता है.

लवण भास्कर चूर्ण निर्माण सामग्री और विधि

कैसे बनाएं लवण भास्कर चूर्ण ( How to Prepare Lavan Bhaskar Churn ) :

  • सामग्री ( Material Required ) :

–    96 ग्राम : समुद्री नमक

–    48 ग्राम : अनार दाना

–    24 ग्राम : विडनमक

–    24 ग्राम : सेंधा नमक

–    24 ग्राम : पीपल

–    24 ग्राम : काला जीरा

–    24 ग्राम : पिपलामुल

–    24 ग्राम : तेजपत्ता

–    24 ग्राम : तालीस पत्र

–    24 ग्राम : नागकेशर

–    24 ग्राम : अम्लवेत

–    12 ग्राम : जीरा

–    12 ग्राम : काली मिर्च

–    12 ग्राम : सौंठ

–    06 ग्राम : इलायची

–    06 ग्राम : दालचीनी

सबसे पहली बात तो ये कि उपरलिखित सारी सामग्री किसी भी पंसारी के पास आसानी से मिल जायेगी. इनसे चूर्ण बनाने के लिए आप सबसे पहले सभी सामग्री को छान लें और उसमें नीम्बू का रस मिलाएं. अब इस मिश्रण को छाया में सुखाएं, इस प्रक्रिया को भावना देना भी कहा जाता है. बस इतना मात्र करने से ही आपका लवण भास्कर चूर्ण तैयार हो जाता है.

सावधानी ( Cautions ) : इस चूर्ण को लेते वक़्त आपको ध्यान रखना है कि उच्च रक्तचाप रोगी और गुर्दे के रोगों से परेशान व्यक्ति इसका सेवन ना करें.

सादर आभार :- http://www.jagrantoday.com/, https://plus.google.com/116554774080109037247/,

http://www.thehealing.in/, http://inbcn.in/

loading...
Loading...