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जामुन :- What you know about the healing properties of these berries

जामुन :- What you know about the healing properties of these berries
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Java Plum/जामुन/Jamun

जामुन की शक्ल की तरफ जाये तो यह बैगन के रंग से मिलता जुलता है कहाँ अभी आम को मौसम जाने को है और ऐसे मौसम में जामुन ने बाज़ार में दस्तक देनी शुरु कर दी है क्योंकि मौनसून ने भारत में दस्तक दे दी है तो अब आम के जाने का समय हो गया और जामुन के खाने का समय हो गया है कुदरत भी फलों को समय के हिअब से

जब फलों का राजा आम बाजारो में राज कर रहा होता है, और अपनी विभिन्न प्रजातियों और स्वादों से लोगों का मन मोह रहा होता है, उसी बीच बाजार में अपने गुणों की खान लिए एक और फल अपनी मौजूदगी दर्ज करवाता है, जिसका नाम है “जामुन”. यू तो जामुन रंग में काला और स्वाद में थोड़ा तौरा होता है, परंतु मौसम में हर फल को खाने का अपना एक अलग ही मजा होता है. फिर जामुन जैसे फल को खाने के तो फायदे भी बहुत है. आइये आज आपको जामुन के फ़ायदों से अवगत कराते है, ताकि इस मौसम में जब आप जामुन खाये तो उसके लिए आपका एक अलग ही नजरिया हो.

Jamun अपने खट्टे-मीठे और कसैले स्वाद के कारण सबका पसंदीदा फल है। इसे विभिन्न घरेलू नामों जैसे जामुन, राजमन, काला जामुन, जमानी, ब्लैकबेरी आदि के नाम से जाना जाता है।

Jamun का फल 70 प्रतिशत खाने योग्य होता है। इसमें ग्लूकोज और फ्रक्टोज दो मुख्य स्त्रोत होते हैं। फल में खनिजों की संख्या अधिक होती है। अन्य फलों की तुलना में यह कम कैलोरी प्रदान करता है। एक मध्यम आकार का जामुन 3-4 कैलोरी देता है। इस फल के बीज में काबरेहाइड्रेट, प्रोटीन और कैल्शियम की अधिकता होती है। यह लोह का बडा स्त्रोत है। प्रति 100 ग्राम में एक से दो मिग्रा आयरन होता है। इसमें विटामिन बी, कैरोटिन, मैग्नीशियम और फाइबर होते हैं।

पथरी रोग में Jamun की गुठली का पाउडर दही के साथ सुबह-शाम 3 ग्राम की मात्रा में लें। इससे पथरी धीरे-धीरे गलकर निकल जाती है। इसके अलावा पका जामुन खाने से भी पथरी के मरीज को आराम मिलता है।

Jamun की छाल को छाया में सुखाकर बारीक पीसकर कपडे से छान लें। इसका प्रयोग मंजन के रूप में करें। इससे दांत मजबूत होते हैं, साथ ही पायरिया और दांत दर्द से भी छुटकारा मिलता है।

डायबिटीज या मधुमेह में जामुन का उपयोग 

डायबिटीज या मधुमेह के घरेलू नुस्खे के तौर पर Jamun सालों साल से भारतीय परिवारों के बीच जाना जात रहा है, लेकिन आधुनिक समय में हुई कई रिसर्च ने इस फल का महत्व और बढ़ा दिया है। अब ये साबित हो चुका है कि डायबिटीज के उपचार में जामुन का फल,बीज,पेड़ की छाल का खासा महत्व है।

दरअसल, Jamun गुणों का भंडार है। इसमें विटामिन बी और आयरन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। एनीमिया (खून की कमी) के मर्ज को दूर करने में और रक्त में हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए Jamun का सेवन लाभप्रद है। यही नहीं जामुन सेवन से त्वचा का रंग निखरता है। जिन लोगों को ‘सफेद दाग’ का मर्ज है, उन्हे जामुन खाना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार मधुमेह टाइप-2 को नियंत्रित करने में भी Jamun सहायक है। इसके लिए Jamun की गुठली के चूर्ण की 5 ग्राम मात्रा का सुबह नाश्ते में और दोपहर के भोजन के बाद और फिर शाम के नाश्ते में और रात के भोजन के बाद सेवन करना चाहिए। इस प्रकार मधुमेह के रोगी दिन में 15 से 25 ग्राम मात्रा में Jamun की गुठली के चूर्ण का प्रयोग कर सकते है।

Jamun का फल और इसकी गुठली असाधारण रुप से रक्त शर्करा की अधिकता को नियंत्रित करने की अद्भुत क्षमता रखती है। औसतन 100 ग्राम जामुन में 62 किलो कैलौरी ऊर्जा, 1.2 मिली ग्राम लोहा, 15 मिली ग्राम कैल्शियम, 15 मिली ग्राम फास्फोरस 18 मिलीग्राम विटामिन सी, 48 माइक्रोग्राम कैरोटीन,55 मिलीग्राम पोटेशियम,35 मिली ग्राम मैग्नीशियम और 25 मिलीग्राम सोडियम पाया जाता है।

जानकार लोग बताते हैं कि Jamun का सेवन खाने के बाद किया जाना चाहिए। आयुर्वेद के मुताबिक Jamun वात दोषकारक है। लेकिन,वात रोग पीड़ित शख्स को बहुत ज्यादा जामुन नहीं खाने चाहिए। जामुन का सिरका पेट दर्द, गैस, अतिसार, हैजा आदि रोगों में औधधि की तरह है। एक रिसर्च के मुताबिक, Jamun में रक्त स्राव रोकने की अद्भुत क्षमता है। ये मसूड़ों में होने वाले रक्त स्राव में बेहद उपयोगी है। Jamunऔर आंवले के रस को समान मात्रा में मिलाकर पीने से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है।

गुठली-फल तो फल Jamun की गु्ठली की गिरी में जम्बोलिन ग्लूकोसाइड पाया जाता है। जिसका प्रमुख लक्षण यह है कि यह तत्व स्टार्च को शर्करा में परिवर्तित होने से रोकता है।अतः मधुमेह या सुगर के रोगियों के लिए इसकी गुठलियोँ का चूर्ण अच्छा फायदा करता है। इसके अतिरिक्त क्लोरोफिल,एल्ब्यूमिन,गेलिक एसिड,रेजिन व चर्बी आदि अनेक बहुमूल्य पदार्थ पाए जाते हैं। इसमे लोह तत्व भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह लोह तत्व इतना सोम्य व गुणकारक होता है कि इससे किसी प्रकार का नुकसान नही हो सकता अपितु यह लोह शरीर में लोह की कमी को पूरा करने के साथ शरीर यकृत(जिगर)और प्लीहा(तिल्ली)आदि शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर लाभकारी परिणाम डालता है अतः शरीर में रक्त की प्रचुर मात्रा में बृद्धि होती है।
जामुन  के बृक्ष की छाल–   स्वाद में मधुर,कसैली,पाचक,रुक्ष,शरीर के मलों(दोषों)को उनके निकलने वाले मार्गों से ही निकालने वाली है यह रुचिकर पित्त दाह में तत्काल शान्तिकारक औषधी है।
सिरका- Jamun का सिरका पेट सम्बंधी रोगों के लिए लाभकारक है।

जामुन के अन्य लाभ :- 

1-मधुमेह- जामुन की गुठली का चूर्ण 5ग्रा.दिन में  दो बार शहद से या जल के साथ लेते रहने से मूत्र में शक्कर की मात्रा कम हो जाती है।
जामुन की गुठली को सुुखाकर उसका पाउडर बनाकर रख लें। नियमित रूप से आधा चम्मच की मात्रा में सुबह शाम पानी के साथ इसका सेवन करें। जामुन की छाल को सुखाकर उसे जलाएं और राख बनाकर छान लें। फिर इसे बोतल में भरकर रख लें। इसके सेवन से सुबह शाम 60-65 मिली ग्राम की मात्रा में खाली पेट पानी के साथ इसके सेवन करने से डायबिटीज नियंत्रित रहता है।
परहेज- चावल आलू शक्कर व मीठे पदार्थों का सेवन बन्द कर दें।जौ चने की रोटी,गाय का फीका दूध,मक्खन फल शाक,फूलशाक आदि का सेवन करें।
2-मोतीझरा- जामुन के कोमल पत्ते,गुलदाउदी के फूल,काली मिर्च समान भाग लेकर जल के साथ पीस लें। मोतीझरा के रोगी को पिलाएं तुरन्त शान्ति मिलेगी। रोग भी दूर होगा।
3-रक्त प्रदर-महिलाओं की व्याधि रक्तप्रदर में जामुन की गिरी का चूर्ण शक्कर में मिलाकर दिन में तीन वार सेवन करने से रक्त प्रदर में लाभ मिलता है।
4-बार बार पेशाव जाना(बहुमूत्र)-जामुन की गिरी का बारीक चूर्ण इसी चूर्ण के बराबर कालेतिल साफ करके मिला लें। 10-10 ग्रा.सुबह शाम दूध से लें बहुमूत्र दूर हो जाता है।
5-आवाज वैठना- यदि आपकी आवाज बैठ गई है या मोटी या भारीपन लिए हुए है और आप इससे छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपको शहर में जामुन की गुठली का पाउडर मिलाकर लेना चाहिए। इससे आवाज का भारीपन दूर होता है साथ ही आवाज भी साफ हो जाएगी।
6-जामुन और आम की गुठलियों का 2-2 ग्राम पाउडर छाछ के साथ दिन में तीन बार लेने से पेट दर्द दूर होता है।
7-फोड़े फुंसी -Jamun की गुठली को पानी के साथ घिसकर चेहरे पर लेप करने से मुंहासे और फुंसियां दूर होती हैं और चेहरे का सौंदर्य निखरता है।
8- आग से जले के घाव में-आग से जलने पर घाव बन गया हो तो Jamun की छाल की राख नारियल तेल के साथ मिलाकर घाव लगाने से लाभ होता है।
9-मंजन -Jamun की छाल को छाया में सुखाकर बारीक पीसकर कपडे से छान लें। इसका प्रयोग मंजन के रूप में करें। इससे दांत मजबूत होते हैं, साथ ही पायरिया और दांत दर्द से भी छुटकारा मिलता है।
एक मान्यता के अनुसार जामुन का फल गर्भवती महिलाओं को खिलाने से उनके होने वाले बच्चे के होंठ सुन्दर होते है। जामुन के बीज से बने पाउडर को आम के बीज के पाउडर के साथ मिलाकर सेवन करने से डायरिया में काफी राहत मिलता है। कुल मिलाकर जामुन में एक से बढ़कर एक गुण हैं।

विशेष :- जामुन को कभी भी दूध के साथ न लें,जबकि भोजन के बाद नमक लगा कर लेना अत्यंत गुणकारी है।

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