HomeHealth Tips

These Ayurvedic measures to protect children from diseases

These Ayurvedic measures to protect children from diseases
Like Tweet Pin it Share Share Email

बच्चों को बीमारियों से बचाने के ये आर्युवेदिक उपाय

बच्चों के स्वभाव और रहने सहने के तरीके धीरे धीरे बदल रहे हैं जिसका असर उनके मन और मस्तिष्क पर उभरने लगा है एक समय था जब बीमार होना सिर्फ बुढ़ापे से जुड़ा हुआ था और बच्चों का बीमार होना अजूबा माना जाता था, लेकिन आज बच्चे बूढ़ों से भी ज़्यादा बीमार पड़ने लगे हैं। उसके पीछे का में कारण है सिर्फ और सिर्फ पढाई का बोझ ! आज के समय में हर माँ बाप चाहते हैं की उनका बच्चा हर सब्जेक्ट में अच्छे नंबर ले कर आये इसके लिए उन्हें ऐसे स्कूल में डाला जट्टा है जहाँ इंग्लिश का बोल बाला हो और बच्चा जल्दी जल्दी इंग्लिश में बात कर सके और सारा टाइम स्कूल के काम में ही बिता दे खेलने का समय ही ना मिले ! और इसी तरह पौष्टिक आहार के बजाय ब्रेड, बिस्किटस्, नूडल्स तथा पिज्जा पर पलने वाले बच्चों की पाचक अग्नि दुर्बल हो जाती है। इससे शरीर में आसानी से आम बन कर आगे कई बीमारियां पैदा करता है। मैदान में कबड्डी या फुटबॉल खेलने के बजाय बच्चों का ज्यादा वक्त टीवी देखने में और मोबाइल तथा कंप्यूटर पर गेम्स खेलने में निकल जाता है।

व्यायाम का अभाव जहां एक तरफ वजन बढता है, वहीं दूसरी तरफ शरीर को दुर्बल बना देता है। खाद्यान्न में होने वाली मिलावट, हर तरफ बढ़ता प्रदूषण और पढ़ाई के दौरान सताने वाला मानसिक तनाव जैसे घटक बच्चों की रोगप्रतिरोधक शक्ति को और भी दुर्बल बना देते हैं। कभी-कभी, माता-पिता खुद भी अस्थमा जैसे बीमारियों से पीड़ित रहते हैं, जिससे उनकी रोगप्रतिरोधक शक्ति भी दुर्बल होती है।

आयुर्वेद में रसायन के महत्व

बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए आयुर्वेदिक रसायन लाभदायक साबित होते हैं। आयुर्वेदिक रसायन, बच्चों का शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक पोषण करने तथा उनकी रोगप्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने का काम करते हैं। आयुर्वेद का मानना है कि हमारा शरीर सात धातुओं से बना है। शरीर के सभी अंग किसी न किसी धातुओं से ही बने हैं। बुद्धि, स्मृति जैसे भाव भी धातुओं के माध्यम से ही कार्य करते हैं।

इन भावों का और सभी संस्थाओं का कार्य ठीक से चले, इंसान की रोग प्रतिरोधक शक्ति अच्छी रहे, इसके लिए सभी धातुओं का स्वस्थ होना आवश्यक होता है। ‘लाभोवायो ही शस्तानां रसादिनां रसायनम्’ यह आयुर्वेद ग्रंथ की पंक्ति रसायन संकल्पना की व्याख्या करती है। इस व्याख्या के अनुसार रसादि धातुओं का पोषण करने वाले द्रव्यों को रसायन कहा गया है।

दूध से बने पदार्थ उत्तम रसायन हैं

दूध और दूध से बने पदार्थ सौभाग्य से हमारे भारतीय आहार में कई ऐसे द्रव्य हैं, जो उत्तम रसायन हैं। दूध तथा दुग्ध निर्मित अन्य पदार्थ जैसे मक्खन एवं घी इसके उत्तम उदाहरण हैं। रुप एवं गुण में रसधातु से समान दिखाने वाला दूध आद्य रसधातु को तो पोषित करता ही है, लेकिन उसकी आगे की सभी धातुओं का खासकर हड्डियों का भी पोषण करता है। दूध के सार भाग से संपन्न घी तो सबसे उत्तम रसायन कहा गया है।

एक तरफ शरीर के धातुओं को बल देने वाला घी दूसरी तरफ बुद्धि, मेधा, स्मृति एंव धृति को भी मजबूत करता है। शरीर के साथ-साथ बच्चों को मानसिक स्तर पर भी सशक्त बनाता है। शायद इसलिए घृत को आयुर्वेद ग्रंथों में ’नित्य रसायन’ कहा गया है। एकाग्रता का अभाव, इम्तेहान में वक्त पे याद न आना, रात को अच्छी नींद न आना, बाल जल्दी सफेद होना आदि समस्याओं से आजकल बच्चे पीड़ित होते हैं। ऐसे में दूध व दूध से बने उत्पाद बहुत लाभदायक होते हैं।

मेवे (ड्राई फ्रूट्स)

मस्तिष्क का पोषण करने वाले अन्य दो रसायन हैं- बादाम तथा अखरोट। एक तरफ अखरोट जहां बुद्धि एवं मेधा को बढ़ाकर बच्चों को शिक्षा में उन्नति करने के लिए उपयुक्त साबित होता है, वहीं बादाम शरीर के साथ मन को भी स्थिरता प्रदान करता है। मधुर होने की वजह से बच्चों को प्रिय होने वाले खजूर तथा छुआरा लौह, कैल्शियम, पोटाशियम आदि धातुओं से भरे होते हैं।

इससे वो शरीर में रक्त, अस्थि आदि धातुओं को बढ़ाने का कार्य करते हैं। इनमें मौजूद जीवनसत्व बच्चों को रात के अंधेपन से बचाते हैं। इसलिए उनका सेवन जरुर करना चाहिये। एंटीआक्सीडेंट, फ्नेवराएड्स, विटामिन सी, ई आदि द्रव्यों से परिपूर्ण किशमिश तथा मुनक्का भी बच्चों को पसंद आते हैं।

शहद का सेवन बच्चों के लिये लाभदायक है

हड्डियों, दांतों, मसूड़ों को मजबूत बनाने वाले ये दोनों द्रव्य बच्चों को मलावरोध से भी बचाते हैं। शहद का सेवन बार-बार खांसी, जुकाम की शिकायत करने वाले बच्चों के लिए शहद सर्वोत्तम रसायन है। मधुर होने के बावजूद कृमियों को नष्ट करने वाला शहद बलगम को हठाकर श्वसन संस्था के सभी विकारों से बच्चों को बचाते हैं। शहद, शरीर की हर धातु तक पोषक द्रव्यों के पहुंचाने का रास्ता खोलने में महत्त्वपूर्ण कार्य करता है। जैम या सॉस खाने के बजाय शहद अदरक रस के साथ नियमित रुप से सेवन करना बच्चों के लिये लाभदायक है। श्वसनसंस्था की अस्थमा, ब्रॉकायटिस, सायनुसायरिस जैसी सभी बीमारियां इससे बच्चों के आसपस भी नहीं आती।

बच्चों के लिए ठंडाई

चार मगज, बादाम, खसखस आदि द्रव्यों को मिलाकर दूध से बनाई गई, ठंडाई भी एक तरह से शारीरिक तथा मानसिक स्तरों पर रसायन का ही कार्य करती है। बच्चों के मन को स्थिरता देने वाला प्राणायाम भी एक तरह का रसायन ही है। बच्चों का भावनात्मक पोषण अच्छा हो इसलिए उनको माता-पिता से पर्याप्त समर्थन एवं संस्कार मिलना जरुरी होता है। घर में पूजा-पाठ हो, यज्ञ-हवन किये जाएं तो बच्चों को अच्छे संस्कार मिलते हैं और भावनात्मक स्थिरता पैदा होती है। इसलिए ये विधियां भी रसायन स्वरुप ही हैं। ऐसी चीजों  की मदद से बच्चों का शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक विकास करना और उन्हें बीमारियों से बचाना संभव है। बच्चे कोमल स्वभाव के होते हैं यदि उन्हें प्यार से अपने धर्म संस्कार और रीती रिवाज़ से अवगत करवाया जाये तो वो उसमे रूचि भी लेते हैं और उसका पालन भी करते हैं बस हम लोग के पास ही उनको ये समझाने के लिए समय नहीं है और सारा दोष बच्चों को दे दिया जाता है यही कारण है की वो जिद्दी होने लगते हैं और अपने माता पिता और दादा दादी की सेवा करना भूल गए हैं और पश्चमी सभ्यता की और देख देख कर और टीवी की माध्यम से जो सिखाया जाता है वो सिखाते हैं और अपनी धर्म संस्कृति को भूलते जा रहे है जो की एक चिंता का विषय है

loading...
Loading...