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बेल का शरबत घर पर बनाने की विधि

बेल का शरबत घर पर बनाने की विधि
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बेल (Bael )का शरबत

बेल खनिज तत्वों से तथा विटामिनों से भरपूर फल हैं. और बेल के फल में विभिन्न तत्वों की भी मात्रा पाई जाती हैं. पके हुए बेल के गूदे में 55 प्रतिशत केरोटिन की मात्रा उपलब्ध होती हैं, 0.13 प्रतिशत थायमिन की मात्रा होती हैं, 0.03 प्रतिशत रिवोफ्लोविन तत्व की मात्रा पाई जाती हैं. इसमें 1.1 निमासिन विद्यमान होता हैं. बेल के गूदे में विटामिन “सी” की 8 प्रतिशत मात्रा भी उपलब्ध होती हैं. बेल में द्रव्य के रूप में भी कुछ तत्व स्थित होते हैं. इसमें म्युसिलेस, पैक्टिन, शर्करा, टेनिन, उड़नशील तेल, निर्यास, भस्म तथा मर्मोलोसिन नामक द्रव्य तत्व पाये जाते हैं. बेल के पके हुए फल के बीजों में वसा भी पाई जाती हैं.         

गर्मियों में Bael  (Wood Apple) यानी बिल्व का सेवन शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है. बिल्व की उपयोगिता से कम ही लोग परिचित है. अधिकांश लोग बिल्व को शिवजी को चढ़ाए जाने वाले बिल्व पत्र के कारण ही जानते हैं. इसीलिए इसके फल का उपयोग बहुत कम लोग करते हैं. बिल्व का फल अनेक रोगों में जबरदस्त दवा का काम करता है. बेल के फल का जीवनकाल काफी लंबा होता है. पेड़ से टूटने के कई दिनों बाद भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. बेल का इस्तेमाल कई तरह की दवाइयों को बनाने में तो किया जाता है ही साथ ही ये कई स्वादिष्ट व्यंजनों में भी प्रमुखता से इस्तेमाल होता है. Bael में प्रोटीन, बीटा-कैरोटीन, थायमीन, राइबोफ्लेविन और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है.

आईये आज बेल का शरबत बनाते हैं.

आवश्यक सामग्री

बेल फल – 1
चीनी – 3 टेबल स्पून
भुना पीसा जीरा – 1 छोटी चम्मच
काला नमक – 1 चम्मच

विधि

सबसे पहले बेल को धोकर काटिये और गूदा निकाल लीजिये.
एक बर्तन में इतना पानी लें कि गूदा डूब जाए, इसे आधे घंटे के लिए पानी में छोड़ दीजिये.
अब गूदे को अच्छी तरह मसल कर चाय छलनी से छान लीजिये.
निकले हुये रस में चीनी मिला लीजिये.  जब चीनी अच्छी तरह घुल जाय तो इसमें आवश्यकता अनुसार ठंडा पानी मिलाईये.
नमक और भुना जीरा भी मिला लीजिये.
ठंडी मीठी बेल की शिकंजी तैयार है.
एक बेल के फल से लगभर चार पांच गिलास शरबत बन जाता है.

बेल के औषधीय गुण 

Bael का गूदा बहुत से कामों में प्रयुक्त होता है। इसका गूदा खाने से हर प्रकार के दस्त रुक जाते हैं। Bael का मुरब्बा, शरबत या शिकंजी लेने से भी दस्तों की समाप्ति हो जाती है। Bael की गिरी भी छोटे-मोठे बहुत से रोगों के लिए उपयोगी है। औषधीय उपयोगी इस प्रकार हैं :- 
खूनी बवासीर :- 10 ग्राम Bael गिरी, सात कालीमिर्च, 10 ग्राम मिश्री और दो सफेद इलायची के दाने-सबको अच्छी तरह खरल कर लें। फिर इसमें से आधी दवा सुबह और आधी शाम को लेने से खुनी बवासीर चली जाती है।

रतौंधी :- Bael की पत्तियों का शरबत पिने से रतौंधी का रोग जल्दी ठीक हो जाता है।
बहरापन :- 20 ग्राम बेल का गूदा, 50 ग्राम बकरी का दूध तथा 10 ग्राम गोमूत्र- तीनों चीजों को सरसों के तेल में पका- छान कर कान में डालें। इससे बहरापन दूर हो जाता है।
मुंह के छाले :- Bael के हरे पत्तों को पानी में उबालकर रोज कुल्ला करने से मुंह के छाले (मुंह आना) दूर हो जाते हैं।

शरीर की दुर्गंध :- बेलपत्र का रस तीली के तेल में मिलाकर मालिश करें। इससे शरीर की दुर्गंध दूर होती है।

दस्त :- पके हुए Bael का गूदा खाने या उसे पानी में घोलकर पिने से दस्त रुक जाते हैं। Bael का मुरब्बा या चूर्ण भी दस्तों में अकसीर है।

खूनी दस्त :- Bael का गूदा, कोसला, जायफल तथा अफीम- सबको पानी में घोलकर मिला लें। फिर पेट पर लेप करें। इससे खूनी दस्त बंद हो जाते हैं।

दिल की धड़कन :- यदि दिल स्वाभाविक गति से अधिक तेज धड़कता है तो उसे रोग मना जाता है। Bael के पेड़ की थोड़ी-सी छाल को पानी में डालकर अच्छी तरह पकाएं। जब पानी आधा रह जाए तो उसे छानकर पी जाएं। इस काढ़े से दिल की धड़कन स्वाभाविक हो जाती है।

गर्भवती की उल्टी :- Bael का गूदा तथा धनिया- दोनों का उचित भाग एक कप पानी में डालकर आग पर चढ़ा दें। जब पानी आधा कप रह जाए तो उसमें जरा-सी शक्कर डालकर छान लें। इस काढ़े को पानी से गर्भवती स्त्री की उल्टी बंद हो जाती है।
बेल का सेवन कभी भी ज्यादा मात्रा में नही करना चाहिए. क्योंकि इसका अधिक सेवन करना सेहत के लिए हानिकारक होता हैं.
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