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मांग में सिंदूर न भरने से होने वाले नुक्सान

मांग में सिंदूर न भरने से होने वाले नुक्सान
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मांग में सिंदूर

हर माँ बाप की इच्छा होती है की उनकी लड़की को अच्छा पति मिले और वो हंसी ख़ुशी अपना जीवन अपने पति के साथ जिये और हर औरत का ये सपना होता है की वो सुहागिन ही इस दुनिया से विदा हो ! जब भी वो किसी मंदिर और किसी बुजुर्ग से आशीर्वाद में सदा सुहागिन का आशीर्वाद लेती है तो फूली नहीं समाती! लेकिन आज कल कुछ क्या सच कहू तो 80% से ज्यादा औरतों ने हमारी इस हिन्दू मान्यता को मजाक बना कर रख दिया है में तो इसका दोष उन माँ बाप को देता हूँ जिन्होंने अपने बच्चों को ये संस्कार ही नहीं दिया की हिन्दू धर्म में मांग में सिंदूर का  क्या महत्व है ? मांग में सिंदूर क्यों भरा जाता है ? मांग में सिंदूर भरने का क्या फायदा है ? यदि कोई सुहागिन मांग में सिंदूर ना भरे तो उसका क्या मतलब है ? यदि मांग में सिंदूर गलत या मोड़ तोड़ कर भरा जाये तो उसके आपके जीवन पर क्या प्रभाव है ? आज हम आपको बताने का पर्यास करेंगे

मांग मेँ सिन्दूर स्त्रियाँ क्योँ लगाती हैँ और इसकी वैज्ञानिकता क्या है ?

(1) भारतीय वैदिक परंपरा खासतौर पर हिंदू समाज में शादी के बाद महिलाओं को मांग में सिंदूर भरना आवश्यक हो जाता है। आधुनिक दौर में अब सिंदूर की जगह कुंकु और अन्य चीजों ने ले ली है। सवाल यह उठता है कि आखिर सिंदूर ही क्यों लगाया जाता है।

दरअसल इसके पीछे एक बड़ा वैज्ञानिक कारण है। यह मामला पूरी तरह स्वास्थ्य से जुड़ा है। सिर के उस स्थान पर जहां मांग में सिंदूर भरी जाने की परंपरा है, मस्तिष्क की एक महत्वपूर्ण ग्रंथी होती है, जिसे ब्रह्मरंध्र कहते हैं। यह अत्यंत संवेदनशील भी होती है। यह मांग के स्थान यानी कपाल के अंत से लेकर सिर के मध्य तक होती है। सिंदूर इसलिए लगाया जाता है क्योंकि इसमें पारा नाम की धातु होती है। पारा ब्रह्मरंध्र के लिए औषधि का काम करता है। महिलाओं को तनाव से दूर रखता है और मस्तिष्क हमेशा चैतन्य अवस्था में रखता है। विवाह के बाद ही मांग इसलिए भरी जाती है क्योंकि विवाहके बाद जब गृहस्थी का दबाव महिला पर आता है तो उसे तनाव, चिंता और अनिद्रा जैसी बीमारिया आमतौर पर घेर लेती हैं। पारा एकमात्र ऐसी धातु है जो तरल रूप में रहती है। यह मष्तिष्क के लिए लाभकारी है, इस कारण सिंदूर मांग में भरा जाता है।

(2) मांग में सिंदूर भरना औरतों के लिए सुहागिन होने की निशानी माना जाता है। विवाह के समय वर द्वारा वधू की मांग मे सिंदूर भरने के संस्कार को सुमंगली क्रिया कहते हैं। इसके बाद विवाहिता पति के जीवित रहने तक आजीवन अपनी मांग में सिंदूर भरती है। हिंदू धर्म के अनुसार मांग में सिंदूर भरना सुहागिन होने का प्रतीक है। सिंदूर नारी श्रंगार का भी एक महत्तवपूर्ण अंग है। सिंदूर मंगल-सूचक भी होता है। शरीर विज्ञान में भी सिंदूर का महत्त्व बताया गया है। सिंदूर में पारा जैसी धातु अधिक होनेके कारण चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पडती। साथ ही इससे स्त्री के शरीर में स्थित विद्युतीय उत्तेजना नियंत्रित होती है। मांग में जहां सिंदूर भरा जाता है, वह स्थान ब्रारंध्र और अध्मि नामक मर्म के ठीक ऊपर होता है। सिंदूर मर्म स्थान को बाहरी बुरे प्रभावों से भी बचाता है। सामुद्रिक शास्त्र में अभागिनी स्त्री के दोष निवारण के लिए मांग में सिंदूर भरने की सलाह दी गई है।

हिंदू स्त्री के लिए शादीशुदा होने की निशानी होने के अलावा सिन्दूर के कुछ स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। इसमें हल्दी, चूना, कुछ धातु और पारा होता है। जब वधू की मांग में सिन्दूर भरा जाता है तो पारा शरीर को ठंडा करता है तथा शरीर को आराम महसूस होता है। इससे उनमें यौन इच्छा भी उत्पन्न होती है। सिन्दूर में पारा धातु पर्याप्त मात्रा में रहता है ! मर्म स्थान में रोम छिद्रों द्वारा पारे का कुछ अंश सुषमणा नाड़ी की सतह तक पहुंचता रहता है ! जनेन्द्रियों को क्षति पहुंचाने वाले कीटाणु जब मर्म स्थान से सुषमणा नाड़ी में रक्त के साथ प्रवाहित होते हैं तब पारा उन्हें नष्ट कर देता है ! फलस्वरूप बुद्धिमान एवं स्वस्थ बच्चे का जन्म होता है !

बच्चों की देखभाल, अन्य घरेलू कार्य तथा बालों को सुखाने में समय लगने के कारण स्त्रियों को नित्य सिर धो पाना संभव नहीं हो पाता है, जिसके कारण सिर में जूं एवं लीखें पड़ जाती हैं ! मांग में सिन्दूर रहने पर जूं इत्यादि का खतरा नहीं रहता चूंकि पारा जूं की अचूक औषधि है ! सिन्दूर से सौंदर्य बढ़ जाता है ! परन्तु उपरोक्त गुणों के अतिरिक्त सिन्दूर में एक गुण यह भी है कि यह महिलाओं में उत्तेजना पैदा करता है ! इसीलिये कुँवारी कन्याओं एवं विधवाओं को सिन्दूर लगाना वर्जित है !

जो महिलाए अपने परिवार और पति को स्वस्थ और आर्थिक समस्या से मुक्त देखना चाहती है, उन्हें प्रतिदिन अपनी मांग में सिदूर प्रातः और संध्या के समय अवश्य भरना चाहिए. मांग में सिन्दूर भरने से शास्त्र में वर्णित है कि जो महिला अपनी मांग नित्य प्रातः और संध्या के समय भरती है उसका परिवार हमेशा रोगमुक्त, भयमुक्त तथा संपन्न रहता है. औए पति की आयु में वृद्धि होती है घर में कभी कर्ज नहीं चढता है और वह महिला सदा सुहागन का जीवन व्यतीत करती है.

मांग में सिंदूर होने और ना होने से आपके जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव 

  • यदि पत्नी के माँगके बीचो बीच सिन्दूर लगा हुआ है तो उसके पति की अकाल मृत्यू नही हो सकती है।
  • जो स्त्री अपने माँगके सिन्दूर को बालोसे छिपा लेती है उसका पति समाजमेँ छिप जाता है
  • जो स्त्री बीच माँग मेँ सिन्दूर न लगाकर किनारे की तरफ सिन्दूर लगाती है उसका पति उससे किनारा कर लेता है।
  • यदि स्त्रीके बीच माँग मेँ सिन्दूर भरा है तो उसके पति की आयु लम्बी होतीहै।
  • रामायण मेँ एक प्रसंग आता है जब बालि और सुग्रीवके बीच युध्द हो रहा था तब श्रीरामने बालि को नही मारा।जब बालि के हाथो मार खाकर सुग्रीव श्रीरामके पास पहुचा तो श्रीरामने कहा की तुम्हारी और बालि की शक्ल एक सी है इसिलिये मैँ भ्रमित हो गया
    अब आप ही बताइये श्रीराम के नजरो से भला कोई छुप सकता है क्या?

    असली बात तो यह थी जब श्रीराम ने यह देख लिया की बालि की पत्नी तारा का माँग सिन्दूर से भरा हुआ है तो उन्होने सिन्दूर का सम्मान करते हुये बालि को नही मारा ।

    दूसरी बार जब सुग्रीव ने बालिको ललकारा तब तारा स्नान कर रही थी उसी समय भगवान ने देखा की मौका अच्छा है और बाण छोड दिया अब आप ही बताइये की जब माँग मेँ सिन्दूर भरा हो तो परमात्मा भी उसको नही मारते फिर उनके सिवाय कोई और क्या मारेगा।

  • जो महिला कामकाजी है यदि वो सिन्दूर से प्रतिदिन अपनी मांग भरती है तो उसकी उन्नति होने लगती है. तथा घर बरकत बनी रहती है.
  • मांग भरने से महिला के ससुराल पक्ष को ही लाभ नहीं मिलता बल्कि उसके मायके परिवार में भी लाभ होता है. उसके भाई- बहनों से अच्छे सम्बन्ध होने लगते है. तथा सदभाव बढता है. किसी भी प्रकार के भेदभाव समाप्त हो जाते है चाहे वह ससुराल या मायके के पक्ष के हो.
  • इस प्रकार एक सिन्दूर हमारे जीवन में अनेक खुशियों के लेकर आता है. आज ही सिन्दूर का उपयोग करें और अपने घर से दुर्भाग्य को दूर कर दे.
  • यह पोस्ट इसलिए डालना पडा की आजकल फैशन चल रहा है सिन्दूर न लगाने की या हल्का लगाने की या बीच माँग मेँ न लगाकर किनारे लगाने की ।मैँ उम्मीद करता हूँ की आप मेरी इस पोस्ट से हिन्दू धरम की इस मानयता का महत्व समझ गये होगे और अपने पति की लम्बी आयु और अच्छे स्वास्थय उनकी तरक्की के लिये अपने पति के नाम का सिन्दूर अपने माँग मेँ  भर्ती रहेंगी !विशेष :- यदि मेरे किसी मित्र के पास इससे सम्बंधित कोई और जानकारी हो तो वो कमेंट जरुर दें या वो मुझे इ मेल भी कर सकते हैं मेरा e mail address :- hynindia@gmail.com 
  • विशेषज्ञों के अनुसार विशिष्टियों (मानक) के अनुसार सिन्दूर बनाने का कोई भी कारखाना भारत में नहीं है जो कि खेद का विषय है ! आजकल बाजार में सामान्यतः जो सिन्दूर बिकता है वह सेलखड़ी, खडिया पीस कर या आरारोट में विभिन्न रंग मिलाकर उसमें कुछ मातृ में लेडआक्साईड मिलाकर बनाया जा रहा है ! लेडआक्साईड त्वचा के लिए अत्यंत हानिकारक है ! कैंसर जैसे रोग होने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है ! शासन एवं समाजसेवी संस्थाओं को इस ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ! (Read more :- स्वस्तिक (Swastik) अपने आप में विलक्षण है)
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