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These measures have shapely breast wants to

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स्तनों को सुडौल कैसे बनाये ? How do we create shapely breasts

स्तनों का आकार स्त्री की सुन्दरता में चार चाँद तो लगता ही है इसके साथ साथ स्तन कामवृद्घि की कुंजी भी हैं। सुडौल एवं मृदुल स्तनों को स्वस्थ स्तन माना जाता है। अधिकांश महिलाएं स्तनों की देखभाल के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानती। स्तनों की त्वचा को अति संवेदनशील माना जाता है, साथ ही अविकसित स्तनों से मन में हीनता की भावनाएं भी पनपने लगती हैं। स्तनों के समुचित विकास व आवश्यक कसाव के लिए निम्न प्रयोग अत्यन्त ही लाभकारी सिद्घ हो सकते हैं-

ढीले प़ड गये स्तनों तथा त्वचा के झुर्रीदार होने पर एक अण्डे में थो़डा बेसन मिलाकर स्तनों पर लगायें। एक घण्टा तक लगा रहने दें। इस बीच स्तनों को दोनों हाथों से धीरे-धीरे सहलाती रहें।

जब स्तनों के सुस्त निपल तन जाये तो उसे धो लें। एक सप्ताह तक नियमित रूप से ऐसा करते रहने पर झुर्रियां खत्म हो जायेगी तथा ढीली प़डी मांसपेशियों में भी कसाव आ जायेगा।

प्रतिदिन सोने से पहले वक्षस्थल पर अश्‍वगंधादि तेल की धीरे-धीरे गोलाई में मालिश करके सो जाये। इस तेल को लगाने के बाद अगर चोली नहीं पहनें तो उत्तम होगा। यह तेल आयुर्वेदिक औषधि विक्रेता के यहाँ बिकता है।

अगर यह तेल उपलब्ध न हो तो अश्‍वगंधा चूर्ण खरीदकर तिल के तेल में पका कर छानकर शीशी में रख लें। इसकी मालिश स्तनों को सुदॄढ एवं आकर्षक बनाती है।

शहद में माजूफल को घिसकर वक्षस्थल पर लेप करने से विशेष लाभ मिलता है। स्नान से पहले जैतून (आलिव आयल) का तेल या बादाम रोगन को भैंस के दूध के साथ फेंटकर स्तनों पर मालिश करते रहने से वक्षस्थल सुडौल होते हैं। मालिश हमेशा धीरे-धीरे (अधिक दवाब दिये बिना) तथा नीचे से ऊपर की ओर करनी चाहिए। इसका भी ध्यान रखें कि मालिश एवं स्नान में कम से कम आधा घंटा तथा भोजन में तीन घंटे का अन्तर अवश्य ही हो।

आपने अपने परिवार में अपने पति या अन्य पुरुषों को रोज़ाना पुश अप व्यायाम करते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा व्यायाम है, जिससे छाती चौड़ी होती है और मांसपेशियां मज़बूत बनती हैं। महिलाओं के क्षेत्र में भी पुश अप्स काफी फायदेमंद होते हैं, क्योंकि इनकी मदद से उन्हें अपने स्तनों का आकार बढाने तथा आकर्षक स्तन पाने में काफी सहायता मिलती है। आप अब खुद भी पुश अप की प्रक्रिया अपनाकर प्राकृतिक रूप से सुडौल स्तन प्राप्त कर सकती हैं।

एक अनार, उसकी थो़डी-सी छाल तथा अंदाज से थो़डी सी अनार की पत्तियों को लेकर सबको महीन पीस लें। इस मिश्रण को एक कटोरी में रखकर उसमें इतना पानी रख दें कि मिश्रण से पानी थो़डा ऊपर रहे। दूसरे दिन इस मिश्रण को एक-दो उबाल देकर उबाल लें। फिर इसमें जितना पानी शेष बचे, उसका चौथाई भाग क़डवा तेल (सरसों का तेल) डालकर इतना देर पकायें जिससे सिर्फ तेल ही बचे। इस तेल को महीन वस्त्र से छानकर शीशी में रख लें। इस तेल से स्तनों पर नीचे से ऊपर की ओर धीरे-धीरे मालिश करें। इस प्रयोग से आपको आश्‍चर्यजनक लाभ होगा। शीतऋतु (सर्दियों) में यह तेल विशेष लाभ प्रदान करता है।

स्तनों को सुडौल व आकर्षक बनाने के लिए आहार (Breasts, shapely and attractive diet)

स्तन का आकार शरीर के हार्मोन की अनुपस्थिति पर भी निर्भर करता है। आपके शरीर में अगर पुरुष हार्मोन या टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की उपस्थिति होगी तो यह स्तन विकास में बाधा डाल सकता है। इस हार्मोन के अतिरिक्त बात करे तो एस्ट्रोजन की कमी भी छोटे स्तन के पीछे की एक वजह हो सकती है। इन हार्मोनस पर काबू पाने के लिए सबसे अच्छा तरीका नपा तुला खाद्य पदार्थ ही सकता है। आप अपने संतुलित भोजन में चिकन सूप,मछली,सौंफ बीज, सोयाबिन और सोया से बने अन्य खाद्य पदार्थ सब्जियां,फलियां,फल,अंडे,नट्स के साथ-साथ सूरजमुखी के बीज, तिल के बीज और सन बीज भी शामिल कर सकती है।

चिकनाई युक्त संतुलित भोजन प्रचुर मात्रा में लेने के साथ ही कार्बोहाइड्रेट्स, आयरन, प्रोटीन, विटामिन, लवण तत्व भी प्रचुर मात्रा में लेने चाहिए। शरीर को अधिक से अधिक समय तक सीधा रखने का प्रयास करना चाहिए।

व्यायाम या गहरी सांस लेना स्तनों के विकास में जादू का-सा असर करता है। इससे स्तनों की पेशियां सुदॄढ व रक्त से परिपूर्ण होती है। गहरी सांस लेने से फेफ़डों को अधिक आक्सीजन की प्राप्ति होती है। इससे रक्त शुद्घ होता है तथा त्वचा में निखार आता है। तैरना वक्षस्थल के विकास के लिए लाभदायक माना जाता है।

आपने सोया उत्पादों के कई फायदों के बारे में सुना होगा, पर क्या आपको पता है कि यह आपके स्तनों के आकार में वृद्धि करने में भी काफी सहायता करता है। जी हाँ, यह बिलकुल सच है और हज़ारों महिलाओं को इससे लाभ भी प्राप्त हुआ है। आप या तो सोया दूध का सेवन करें, या इसके अन्य खाद्य पदार्थों को अपने खानपान में शामिल करके स्तनों के आकार में वृद्धि करें।

जमीन पर दरी बिछाकर पेट के बल लेट जायें। इसके बाद शरीर के आगेवाले भाग (सिर एवं वक्ष) को ऊपर उठायें और भुजाओं को इस तरह गोलाई में ऊपर-नीचे घुमायें जैसे आप तैर रही हों।

अगर फर्श पर लेटने में परेशानी हो तो पेट के नीचे तकिया रख लें। इस क्रिया को आठ-दस बार करें। इसके बाद सीधे ख़डी होकर दोनों बांहों को तेजी से गोलाई में घुमाएं। आपका वक्ष अवश्य ही सुडौल होगा।

हम सभी जानते हैं कि मांसपेशियों के विकास के लिए प्रोटीन काफी आवश्यक हैं। अतः जिम में जाकर अपनी मांसपेशियां विकसित करने वालों को मांस और अंडे के सेवन की हिदायत दी जाती है जिनमें प्रोटीन भरा हो। इसी तरह महिलाओं के लिए उनके स्तन भी एक प्रकार की मांसपेशियां ही हैं,अतः उन्हें सुडौल वाक्स की प्राप्ति के लिए काफी मात्रा में प्रोटीन का सेवन करना चाहिए।

हाथ की हथेलियों को 6 से 10 सेकंड तक आपस में रगड़ कर पहले हथेलियों में गर्मी और ऊर्जा पैदा कर ले उसके बाद स्तनों को ऊपर उठाते हुए और फिर स्तन को हर तरफ से अच्छी मसाज दे। बेहतर और जल्दी रिजल्ट प्राप्त करने के लिए सुबह और रात में कम से कम 300 की गिनती करते हुए इस नियम का एक महीने तक पालन करें।

बिना ब्रा पहने न रहें। प्राय: स्त्रियां सोचती है कि मासिक धर्म के दौरान ब्रा न पहनने से आराम मिलता है किंतु ऐसा नहीं होता। बिना ब्रा के स्तनों के लटके रहने से उसके ऊतकों पर प्रभाव प़डता है और स्तन ढीले प़ड जाते हैं।

कसरत और योग : सुडौल और बड़े आकार के स्तन पाने में कसरत और योग हमेशा ही सबसे उपयोगी साबित हुए है। स्तन मांसपेशियों के बढ़ाने के लिए आप पुश-अप,डम्बल से ब्रेस्ट प्रेस,वाल प्रेस,स्विंगिंग आर्म्स के साथ-साथ घर पर गोमुखासन,उष्ट्रासन,वृक्षासन,द्विकोणासन आदि योग का अभ्यास सुडौल और अधिक आकर वाले स्तन प्राप्त करने के लिए कर सकती है। ये सभी कसरत और योग आपको शारीरिक ताजगी देने के साथ-साथ शरीर से तनाव भी दूर कर देंगे।

यह आपके स्तनों को बढ़ाने के प्राकृतिक उपचारों में से एक है। मेथी का रस निकालें और इसे अपने स्तनों पर अच्छे से लगाएं। अगर आप इस विधि का रोज़ाना इस्तेमाल करें तो आपको जल्दी ही सुन्दर और बड़े स्तनों की प्राप्ति होगी।

स्तनों को सुडौल बनाये रखने के लिए सावधानियाँ :-

  1. बहुत अधिक ठंडे या बहुत गरम पानी से वक्षों को कभी नहीं धोना चाहिए।
  2. ठंड के मौसम में पारदर्शी शीशे के सामने (खिड़की के शीशे के पीछे, जहाँ से धूप आती हो) वक्षों को खोलकर धूप में सेंक लेना चाहिए।
  3. इस प्रकार की सिकाई के साथ ही अपने हाथ की अंगुलियों से वक्षों की सूखी मालिश करनी चाहिए। वक्षों की मालिश के समय ही जांच भी हो सकती है कि कहीं कोई गांठ वगैरह तो नहीं है। यदि ऐसा प्रतीत हो तो तुरंत लेडी डाक्टर से जाँच कराई जानी चाहिए।
  4. धूप का सेवन 10-15 मिनट से अधिक न करें।
  5. धूप सेंकने के 15 मिनट बाद ही स्नान करें। तुरंत स्नान करना पड़े तो हल्के गुनगुने पानी से स्नान करें।
  6. ज्यादा कसी, ढीली, नायलान युक्त आदि ब्रा न पहनें। सही नं० की ब्रा ही प्रयोग करें।
  7. रात को सोते समय ब्रा उतार कर सोएं और सुबह उठते ही अवश्य पहन लें।
  8. विटामिन युक्त भोजन जैसे हरी सब्जियां, फल, दूध, दही आदि का प्रचुर सेवन करें।
  9. स्तनपान कराने वाली स्त्रियां ब्रा अवश्य पहनें अन्यथा स्तन लटक सकते हैं ।

अपने छोटे स्तनों को उजागर करने के लिए हमेशा छोटे या गलत फिटिंग वाले ब्रा पहनना आपकी ब्रेस्ट स्वाथ्य के लिए हानिकारक हो सकता हैइसलिए स्तनों को बड़े और फुले हुए देखने के लिए आप गद्देदार ब्रा की मदद ले सकती है पर घर पर रहते हुए या अधिक समय तक ऐसी ब्रा को पहनना आपके ब्रेस्ट और स्वास्थ्य दोनों के लिए गलत हो सकता है

स्तनों को मनचाहा आकार देने के आयुर्वेदिक और औषधीय प्रयोग :-

  • आयुर्वेदिक उपचार : अरंडी के पत्ते, घीग्वार (ग्वारपाठा) की जड़, इन्द्रायन की जड़, गोरखमुंडी एक छोटी कटोरी, सब 50-50 ग्राम। पीपल वृक्ष की अन्तरछाल, केले का पंचांग (फूल, पत्ते, तना, फल व जड़) , सहिजन के पत्ते, अनार की जड़ और अनार के छिलके, खम्भारी की अन्तरछाल, कूठ और कनेर की जड़, सब 10-10 ग्राम। सरसों व तिल का तेल 250-250 मिलीग्राम तथा शुद्ध कपूर 15 ग्राम। यह सभी आयुर्वेद औषधि की दुकान पर मिल जाएगा।
  • निर्माण विधि : सब द्रव्यों को मोटा-मोटा कूट-पीसकर 5 लीटर पानी में डालकर उबालें। जब पानी सवा लीटर बचे तब उतार लें। इसमें सरसों व तिल का तेल डालकर फिर से आग पर रखकर उबालें। जब पानी जल जाए और सिर्फ तेल बचे, तब उतारकर ठंडा कर लें, इसमें शुद्ध कपूर मिलाकर अच्छी तरह मिला लें। बस दवा तैयार है। असामान्य व अविकसित स्तन
  • प्रयोग विधि : इस तेल को नहाने से आधा घंटा पूर्व और रात को सोते समय स्तनों पर लगाकर हलके-हलके मालिश करें।
  • लाभ : इस तेल के नियमित प्रयोग से 2-3 माह में स्तनों का उचित विकास हो जाता है और वे पुष्ट और सुडौल हो जाते हैं। ऐसी युवतियों को तंग चोली नहीं पहननी चाहिए और सोते समय चोली पहनकर नहीं सोना चाहिए। इस तेल का प्रयोग लाभ न होने तक करना चाहिए।
  • ▶ अन्य प्रयोग :
  • 1. फिटकरी 20 ग्राम, गैलिक एसिड 30 ग्राम, एसिड आफ लेड 30 ग्राम, तीनों को थोड़े से पानी में घोलकर स्तनों पर लेप करें और एक घंटे बाद शीतल जल से धो डालें। लगातार एक माह तक यदि यह प्रयोग किया गया तो 45 वर्ष की नारी के स्तन भी नवयौवना के स्तनों के समान पुष्ट हो जाएंगे।
  • 2. गम्भारी की छाल 100 ग्राम व अनार के छिलके सुखाकर कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर लें। दोनों चूर्ण 1-1 चम्मच लेकर जैतून के इतने तेल में मिलाएं कि लेप गाढ़ा बन जाए। इस लेप को स्तनों पर लगाकर अंगुलियों से हलकी-हलकी मालिश करें। आधा घंटे बाद कुनकुने गर्म पानी से धो डालें। जो भी परिणाम मिले, उसकी सूचना कृपया हमें जरूर दें।
  • 3. छोटी कटेरी नामक वनस्पति की जड़ व अनार की जड़ को पानी के साथ घिसकर गाढ़ा लेप करें। इस लेप को स्तनों पर लगाने से कुछ दिनों में स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है।
  • 4. बरगद के पेड़ की जटा के बारीक नरम रेशों को पीसकर स्त्रियां अपने स्तनों पर लेप करें तो स्तनों का ढीलापन दूर होता है और कठोरता आती है।
  • 5. इन्ही के साथ सर्वोत्तम यह भी रहेगा कि रात को सोने से पहले किसी भी तेल की 10 मिनट तक मालिश करें। या तो स्वयं करें या अपने पति से कराएं, मालिश के दिनों में गेप न करें, रेगुलर करें व दो माह बाद चमत्कार देखें। स्तनों की मालिश हमेशा नीचे से ऊपर ही करें।
  • 6. स्तनों की शिथिलता दूर करने के लिए एरण्ड के पत्तों को सिरके में पीसकर स्तनों पर गाढ़ा लेप करने से कुछ ही दिनों में स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है। कुछ व्यायाम भी हैं, जो वक्षस्थल के सौन्दर्य और आकार को बनाए रखते हैं।
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