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हरी चटनी बनाने की विधि (Green sauce recipes)

हरी चटनी बनाने की विधि (Green sauce recipes)
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हरी चटनी बनाने की विधि

हरी चटनी बनाने के लिए भारतीय भोजन में हरा धनिया पत्ती का इस्तेमाल मुख्यरूप से किया जाता है. धनिया की पत्ती के साथ साथ पुदीने को भी हरी चटनी के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.

भारत समेत लगभग संपूर्ण विश्व में हरी चटनी का  शौक से इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि इसे इस्तेमाल करने से पूर्व इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि पत्तियां अच्छी तरह से साफ की गई हों . आज हम हरी चटनी में प्रयोग की जाने वाली धनिया के बारे में बात करेंगे

हरी चटनी में प्रयोग होने वाले धनिया पत्ती के गुण

धनिया के बीज में कई phytonutrients पाए जाते हैं. ये डाइट्री फाइबर्स (Fibres Daitry) का भी एक प्रमुख सोर्स है. इसके अलावा इसमें मैगनीज (Manganese), आयरन (Iron ), मैग्न‍िशियम (Magnesium) भी भरपूर मात्रा में होता है. ये विटामिन सी(vitamin क), विटामिन के (Vitamin K ) और प्रोटीन (Protin ) का भी अच्छा सोर्स है. इसमें बहुत कम मात्रा में कैल्शियम (Calcium) , फॉस्फोरस(Phosphorous), पोटैशियम(Potassium) , थायमिन (Thiamin) और कैरोटीन (Carotene)भी पाया जाता है.

हरी चटनी में प्रयोग होने वाले धनिया के पत्ते से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ

1. ये स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले कोलेस्ट्रॉल को कम करने और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है.

2. पाचन तंत्र के लिए भी ये विशेष रूप से फायदेमंद है. ये लीवर की सक्रियता को बढ़ाने में मदद करता है.

3. डायबिटीज के मरीजों के लिए भी ये काफी फायदेमंद होता है. ये ब्लड शुगर के लेवल को नियंत्रित करने का काम करता है.

4. इसमें मिलने वाले फाइटोन्यूट्रिएंट्स रेडिकल डैमेज में सुरक्षा प्रदान करने का काम करते हैं.

5. इसमें मौजूद विटामिन के अल्जाइमर की बीमारी में फायदेमंद होता है.

6. धनिया पत्ती में anti-inflammatory गुण पाया जाता है. जिसकी वजह से ये अर्थराइटिस में भी बहुत उपयोगी होता है.

7. मुंह के घाव को ठीक करने में भी ये काफी कारगर होता है. इसमें मौजूद एंटी-सेप्ट‍िक गुण मुंह के घाव को जल्दी भरने का काम करता है.

8. नर्वस सिस्टम को सक्रिय बनाए रखने में भी धनिया की पत्ती काफी फायदेमंद होती है.

9. त्वचा संबंधी कई रोगों जैसे पिंपल्स होने की समस्या, ब्लैकहेड्स और सूखी त्वचा में इसके इस्तेमाल से काफी फायदा होता है.

10. हरी धनिया को सुबह के वक्त पानी में उबालकर, छान लें. इस पानी को सुबह खाली पेट पीने से पेट की पथरी यूरीन के माध्यम से निकल जाती है.

हरा धनिया के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

हरी चटनी बनाते समय इसमें हरी मिर्च का भी बहुत लाभ है हरी मिर्च वाली धनिये की चटनी बचपन से खाते आ रहे हैं, पहले जब मिक्सी घर में नहीं हुआ करती थी तब सिलबट्टे पर मम्मी या पापा चटनी पीसकर बनाते थे, अभी भी अच्छे से याद है कि थोड़ा थोड़ा पानी पीसने के दौरान डालते थे और चटनी बिल्कुल बारीक पिसती थी, अच्छी तरह से याद है कि उस समय धनिया पत्ती की एक एक पत्ती तोड़कर पीसने के लिये रखते थे, एक भी धनिये का डंठल नहीं गलती से भी नहीं छूटता था। मसाला धनिया, मिर्च, ट्माटर को ओखली में डालकर मूसल से कूटते थे और फ़िर सिलबट्टे पर चटनी को पिसा जाता था।

चटनी भी मौसम के अनुसार स्वाद की बनाई जाती थी, साधारण धनिये की, पुदीना पत्ती के साथ। मसाले में नमक, लाल मिर्च डालते थे फ़िर बाद में हींग और जीरा का प्रयोग भी होने लगा। प्याज और लहसुन के साथ भी चटनी का स्वाद परखा गया।

हरी मिर्च तीखे के अनुसार कम या ज्यादा डालते हैं, अभी थोड़े दिनों पहले बहुत तीखी चटनी खाने की इच्छा हुई तो खूब सारी मिर्च डाल दी तो उस चटनी में से एक चम्मच चटनी भी नहीं खा पाये। अब सोचा कि कम मिर्च की चटनी बनायें तो पता चला कि मिर्च ही इतनी तीखी है कि ५-६ मिर्च में तो बहुत तीखा हो जाता है। बचपन की याद है ७-८ मिर्च में भी चटनी इतनी तीखी नहीं होती थी तो लाल मिर्च डालते थे।

सिलबट्टे पर चटनी पीसने से बैठकर मेहनत करनी होती थी, परंतु मिक्सी में वह सब मेहनत खत्म हो गई, आँखों में जो मिर्च की चरपराहट होती होगी उसका अहसास ही आँखों में पानी ला देता है। अब तो चटनी बनाते समय आँखों में चरपराहट का पता नहीं चलता है। मिक्सी में तो चटनी बनाते समय बीच में  दो बार चम्मच घुमाई और चटनी २-३ मिनिट में बन जाती है, हो सकता है कि चटनी उतनी ही बारीक पिसती हो जितनी कि सिलबट्टे पर, अब याद नहीं, और अब सिलबट्टा है नहीं कि पीसकर देख लें। पर हाँ गजब की तरक्की की है, पहले सिलबट्टे पर पीसने में चटनी का बनने वाला समय कम से कम ३० मिनिट का होता था और अब ज्यादा से ज्यादा ५ मिनिट का होता है।

हरी चटनी बनाने के लिए साम्रगी :-

हरा धनियाँ (Coriander Leaves)- 1 कप (कटी हुई)

टमाटर (Tomato)- 1 (छोटे टुकडो में कटा हुआ)

हरी मिर्च (Green Chilly)- 3-4

अदरक (Ginger)- 1 टुकड़ा

नीबू का रस (Lime Juice)-1 चम्मच

नमक (Salt)- स्वादानुसार

हरी चटनी यदि आप जल्दी बनाना चाहते हैं तो आसान तरीका है मिक्सी के जार में कटे हुये टमाटर , हरा धनियाँ , हरी मिर्च , अदरक , नमक, नींबू का रस और थोडा पानी डालकर बारीक पीस लें। अब इस पिसी हुई चटनी को सर्विंग बाउल में निकाल कर परांठा ,पूरी और किसी भी तरह के स्नैक के साथ सर्व करें। स्वादिष्ट हरी चटनी

यदि हरी चटनी को स्वादिष्ट बनाना हो तो सभी चीज़ों को काट काट कर ओखली में डाल कर मूसल से कूट लें और फिर सिलबट्टे पर उसके हल्का हल्का नींबू का रस डाल कर या पानी का छींटा देते हुए बारीक़ कर ले और फिर उस हरी चटनी से भोजन का स्वाद ही अलग है आप याद रखेंगे और मिक्सी के चटनी और बाजार की Sauce को भूल जायेंगे

जब से मिक्सी घर पर आ गई तो उसी में चटनी बनने लगी और धनिया पत्ती पहले की तरह ही तोड़ी जाती, बिना डंठल के, पर एक बार चटनी हम बना रहे थे तो धनिया पत्ती तोड़ने में बहुत आलस आता था, कि एक एक पत्ती तोड़ते रहो और फ़िर चटनी बनाओ, हमने धनिया की गड्डी धोई और चाकू से पीछे की जड़ें काटकर नजर बचाकर धनिये की चटनी बना डाली, घर में बहुत शोर हुआ कि लड़का बहुत आलसी है और आज चटनी में धनिये के डंठल भी डाल दिये, पर फ़िर उसी में इतना स्वाद आने लगा कि हमारी विधि से ही चटनी घर में बनाई जाने लगी। पर यह तो है कि सिलबट्टे की चटनी का स्वाद अब मिक्सी वाली चटनी में नहीं आता ।

हरी चटनी का असली स्वाद लेना है तो इसे सिलबट्टे पर ही बनाये और आप प्याज़ अदरक लहसुन हरी मिर्च अमचूर या इमली या नींबू  या आंवला भी डाल सकते है जैसे आपको सुविधा हो हरी चटनी खा कर स्वाद आ जाये ऐसा आप बना सकते हैं और खिला सकते हैं

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